कश्मीर में जारी हुई एडवाइजरी, मुठभेड़ वाली जगहों से दूर रहें लोग - Aapki Awaaz

Breaking

आपकी आवाज़ वेब न्यूज़ पोर्टल व्यूअर से अनुरोध करता है कि आप अपने सुझाव हम तक जरूर भेजें.. ताकि आने वाले समय मे हम आपकी मदद से और भी बेहतर कार्य कर सकें... साथ ही यदि आपको लेख अच्छा लगे तो इसे ओरों तक भी पहुंचाए.. प्रकाशन हेतु ख़बरें, विज्ञप्ति मोबाइल- 94251590730 पर व्हाट्सएप्प करें.....प्रदेश, संभाग, जिला, तहसील और ग्राम स्तर पर संवाददाता की आवश्यकता है

कश्मीर में जारी हुई एडवाइजरी, मुठभेड़ वाली जगहों से दूर रहें लोग

जम्मू कश्मीर में प्रशासन ने आम लोगों को अपनी सुरक्षा का ध्यान रखते हुए आतंकी विरोधी अभियान वाली जगहों से दूर रहने की सलाह दी है. प्रशासन की सलाह सेना प्रमुख के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने आतंक रोधी अभियानों में रुकावट डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी.
श्रीनगर, बड़गाम और शोपियां जिले में प्रशासन ने अपने निर्देश में कहा है कि मानव जीवन को नुकसान से बचने के लिए लोग उन जगहों के करीब ना जाएं, जहां सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हो रही हो.
इसके साथ प्रशासन ने जिले में आतंकी रोधी अभियान वाली जगहों के तीन किलोमीटर दायरे में प्रवेश निषेध कर दिया है. हालांकि इसमें साथ ही बताया गया है कि यह निषेधाज्ञा ऐम्बुलेंस, चिकित्सा कर्मियों और सरकारी कर्मचारियों पर लागू नहीं होगी.
बता दें कि सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने आतंकी मुठभेड़ के दौरान सेना पर पथराव करने वालों को देशद्रोही मानकर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी. जनरल रावत का यह बयान घाटी में मंगलवार को हुई दो अलग-अलग मुठभेड़ों में एक मेजर सहित सेना के चार जवानों के शहीद होने के एक दिन बाद आया था. उन्होंने कहा था कि कश्मीर घाटी में स्थानीय लोगों के शत्रुतापूर्ण आचरण के कारण लोग अधिक हताहत होते हैं और सुरक्षा बलों की आतंकवाद रोधी अभियानों के दौरान हमला करने वालों के साथ 'राष्ट्र विरोधी' के तौर पर बर्ताव होगा और उनके खिलाफ 'सख्त कार्रवाई' होगी.
सेना प्रमुख के इस बयान की जहां कुछ राजनीतिक दलों ने आलोचना की है, वहीं रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने उनका समर्थन किया है. पर्रिकर ने कहा कि सेना हर कश्मीरी को आतंकवादी नहीं मानती है, लेकिन अगर कोई आर्मी के खिलाफ कुछ करे, तो मौजूद अधिकारी को फ्री हैंड होता है.
पर्रिकर ने कहा कि सैन्य अभियान में अगर स्थानीय लोगों ने रुकावट डालने की कोशिश की तो, उस समय कमांडिंग ऑफिसर को निर्णय लेने का पूरा अधिकार होता है. उन्होंने साथ ही कहा कि सेना हर कश्मीरी को आतंकियों का समर्थक नहीं मानती, लेकिन जो आतकियों के साथ है, वह आतंकी ही है.
हालांकि उनकी इस चेतावनी का लोगों का ज्यादा असर होता नहीं दिखा और गुरुवार को पुलवामा व शोपियां में स्थानीय लोगों द्वारा पुलिस पर पथराव करने की घटना सामने आई है.