चोरी के आरोपियों पर मेहरबान क्यों है पुलिस? पुलिसिया लापरवाही से आहत पीड़ित ने आत्महत्या को बताया अंतिम विकल्प। - Aapki Awaaz

Breaking

आपकी आवाज़ वेब न्यूज़ पोर्टल व्यूअर से अनुरोध करता है कि आप अपने सुझाव हम तक जरूर भेजें.. ताकि आने वाले समय मे हम आपकी मदद से और भी बेहतर कार्य कर सकें... साथ ही यदि आपको लेख अच्छा लगे तो इसे ओरों तक भी पहुंचाए.. प्रकाशन हेतु ख़बरें, विज्ञप्ति मोबाइल- 94251590730 पर व्हाट्सएप्प करें.....प्रदेश, संभाग, जिला, तहसील और ग्राम स्तर पर संवाददाता की आवश्यकता है

चोरी के आरोपियों पर मेहरबान क्यों है पुलिस? पुलिसिया लापरवाही से आहत पीड़ित ने आत्महत्या को बताया अंतिम विकल्प।








*दीपक तिवारी*/जबलपुर



चोरी के आरोपियों पर मेहरबान क्यों है पुलिस?पुलिसिया लापरवाही से आहत पीड़ित ने आत्महत्या को बताया अंतिम विकल्प।





जबलपुर - एक तरफ तो उसे अपने रोजगार से महरूम कर दिया गया। दूसरी तरफ दुकान में रखा 10 से 15 लाख का कीमती सामान भी उसके हाथ से गया। इस पर पुलिसिया कार्यवाही का आलम देखिए कि बार-बार नामजद रिपोर्ट करने के बावजूद भी पुलिस चोरी की इस घटना की रिपोर्ट तक नहीं लिख रही जांच करना तो बहुत दूर की बात है।

मामला सदर स्थित कैंट थाने के अंतर्गत आता है। जहां सेंट  अलोयसियस कॉलेज के ठीक सामने केक एंड कुकीज के नाम से विगत कई वर्षों से दुकान का संचालन अजीत थारवानी कर रहे थे लेकिन उनकी दुकान के पीछे निवास करने वाले मनीराज पिल्ले और उनके साथियों ने एक दिन उनसे उनकी दुकान के कागजात भरा बैग छीन लिया। जिसकी सूचना उन्होंने कैंट थाने में 8 मई 2020 को दी और उसके कुछ दिन बाद उनकी दुकान के ताले तोड़कर उस पर अपना ताला लगा दिया गया उस समय दुकान का सामान भी दुकान में ही था। इस बात की भी सूचना जून की 6  और 9 तारीख 2020 को केंट थाने में पुनः दी गई। लेकिन लेकिन पुलिस द्वारा आरोपियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गई। दुकान का सारा सामान भी गायब कर दिया गया। इसके बाद इस पूरे घटनाक्रम की शिकायत 24 जून 2020 को कलेक्टर महोदय और एडिशनल एसपी सदर से भी की गई। इस पूरे घटनाक्रम के रिकॉर्डिंग सीसीटीवी कैमरा में कैद है।फरियादी द्वारा समय-समय पर अपनी दुकान के कब्जे और सामान की चोरी की पुलिस के सामने नामजद शिकायत की गई। लेकिन पुलिस ने मामले को संपत्ति विवाद का रंग देकर टालने का प्रयास पुलिस प्रशासन द्वारा किया गया। बिगड़ती आर्थिक स्थिति से पैदा हुए मानसिक तनाव के कारण अजित थारवानी का कहना है कि आत्महत्या ही उसके पास एकमात्र विकल्प बचता है।

*आपकी आवाज**संपादक**7999057770*