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Thursday, June 18, 2020

मोघे बदनावर में क्या पार लगा पाएंगे भाजपा की नांव

भोपाल । कभी अविभाजित मध्यप्रदेश के प्रदेश संगठन की कमान संभालने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता कृष्णमुरारी मोघे को बदनावर विधानसभा उपचुनाव का प्रभारी बनाया गया है। पूरा प्रदेश संभालने वाले मोघे को एक विधानसभा का प्रभारी बनाना भाजपा के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि 9 महीने पहले झाबुआ उपचुनाव में मोघे प्रभारी थे, लेकिन उन्हें वहां मात खाना पड़ी। अब एक बार फिर मोघे के हाथ में उपचुनाव की कमान है और देखना है कि वो अपनी रणनीति में यहां कितने सफल हो पाते हैं?प्रदेश संगठन महामंत्री के पद पर रहने के बाद भाजपा की सक्रिय राजनीति में आए कृष्णमुरारी मोघे पहले सांसद, महापौर और हाउसिंग बोर्ड में राज्यमंत्री रह चुके हैं। वे संगठन के बड़े पदों पर रहते हुए संगठन का काम ही करते आए हैं। पिछले कुछ दिनों से वे मार्गदर्शक की भूमिका में हैं। पिछले साल उन्हें झाबुआ की  जवाबदारी भी सौंपी गई थी। मोघे राजनीति के कुशल रणनीतिकार माने जाते हैं, लेकिन कांतिलाल भूरिया जैसे कांग्रेस के दिग्गज के सामने सारे समीकरण फेल हो गए और भाजपा प्रत्याशी भानु भूरिया 27 हजार 804 मतों के लंबे अंतर से हार गए। इसी दौरान मोघे को आजीवन सहयोग निधि का प्रदेश प्रभारी बनाकर जवाबदारी सौंपी गई, जिसमें उन्होंने अच्छा काम कर दिखाया। अब मोघे बदनावर विधानसभा सीट से चुनाव प्रभारी हैं, जहां कांग्रेस से भाजपा में आए सिंधिया समर्थक राजवर्धनसिंह दत्तीगांव की उम्मीदवारी तय है। दत्तीगांव पिछले चुनाव में मतदान के आधे वोट लेकर जीते थे। मोघे को फिर उपचुनाव में प्रभारी बनाना राजनीतिक समीकरण के लिहाज से ठीक नहीं बैठ रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि जो मोघे कभी पूरे प्रदेश की सीटें संभालते थे, उन्हें बार-बार छोटे-छोटे उपचुनाव की जवाबदारी देकर कहीं उनका डिमोशन तो नहीं किया जा रहा है?

भंवरसिंह के भंवर में न फंस जाए भाजपा
भाजपा के कद्दावर नेता भंवरसिंह शेखावत इसी सीट से विधायक रह चुके हैं, लेकिन पिछले चुनाव में राजवर्धनसिंह दत्तीगांव से हार गए थे। अभी तक शेखावत बदनावर नहीं पहुंचे हैं और उन्होंने इस सीट पर प्रचार करने के लिए भी अभी तक हामी नहीं भरी है। मोघे चूंकि बड़े नेता हैं, इसलिए भी उन्हें इस सीट पर प्रभारी बनाया कि कहीं भंवरसिंह शेखावत की नाराजगी के कारण यहां भाजपा भंवर में न फंस जाए। इस सीट से एक और बड़ी चुनौती पिछला चुनाव लड़े बागी राजेश अग्रवाल की है। उन्हें भी भाजपा को साधना है। हालांकि अग्रवाल ने भी अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हंै।

2018 के चुनाव में ये था वोट का गणित
दो साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी राजवर्धनसिंह दत्तीगांव को 84 हजार 499 मत मिले थे। ये कुल मतदान का 50.40 प्रतिशत था। वहीं भाजपा उम्मीदवार भंवरसिंह शेखावत को 42 हजार 993 वोट मिले थे, जो कुल मतदान का 25.65 प्रतिशत ही थे। वहीं भाजपा के बागी राजेश अग्रवाल 18.48 प्रतिशत, यानी 30 हजार 976 वोट लेकर तीसरे नंबर पर बने हुए थे। इस चुनाव में राजवर्धन 41 हजार 506 वोट से जीत गए थे।

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