बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के मुताबिक नसीमुद्दीन को 22 फरवरी 2018 की तिथि से ही अयोग्य ठहराया गया है. नसीमुद्दीन सिद्दीकी 22 फरवरी 2018 को औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल हो गए थे. - Aapki Awaaz

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Tuesday, July 21, 2020

बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के मुताबिक नसीमुद्दीन को 22 फरवरी 2018 की तिथि से ही अयोग्य ठहराया गया है. नसीमुद्दीन सिद्दीकी 22 फरवरी 2018 को औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल हो गए थे.

बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के मुताबिक नसीमुद्दीन को 22 फरवरी 2018 की तिथि से ही अयोग्य ठहराया गया है. 

नसीमुद्दीन सिद्दीकी 22 फरवरी 2018 को औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल हो गए थे.


नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने हाथी छोड़ थामा था 'हाथ', विधान परिषद की सदस्यता गई


22 फरवरी 2018 की तिथि से अयोग्य घोषितबसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने दी जानकारी


कभी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के शीर्ष नेताओं में शामिल रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने साल 2018 में पार्टी छोड़ दी थी. नसीमुद्दीन सिद्दीकी बसपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे. अब उन्हें विधान परिषद की सदस्यता गंवानी पड़ी है. विधान परिषद अध्यक्ष ने बसपा की ओर से दाखिल शिकायत पर लंबी सुनवाई के बाद अब नसीमुद्दीन सिद्दीकी को विधान परिषद की सदस्यता के अयोग्य ठहरा दिया है.

बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर विधान परिषद अध्यक्ष के निर्णय की जानकारी दी है. मिश्र की ओर से जारी की गई विज्ञप्ति के मुताबिक नसीमुद्दीन को 22 फरवरी 2018 की तिथि से ही अयोग्य ठहराया गया है. नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने 22 फरवरी 2018 को औपचारिक रूप से कांग्रेस की सदस्यता ले ली थी.

बसपा के राष्ट्रीय महासचिव के मुताबिक नसीमुद्दीन सिद्दीकी के कांग्रेस में शामिल हो जाने के बाद ही पार्टी ने विधान परिषद अध्यक्ष के सामने याचिका दाखिल कर दी थी. संविधान की 10वीं अनुसूची के पैरा-2, 1 क और उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य (दल परिवर्तन के आधार पर अयोग्यता) नियमावली 1987 के तहत सिद्दीकी को विधान परिषद की सदस्यता से अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी.

सतीश चंद्र मिश्र ने बताया है कि लंबी सुनवाई के बाद आखिरकार विधान परिषद अध्यक्ष ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी को विधान परिषद की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया. गौरतलब है कि मायावती की सरकार के ताकतवर मंत्रियों में से एक रहे सिद्दीकी को बसपा का मजबूत मुस्लिम चेहरा माना जाता था. साल 2015 में बसपा के टिकट पर विधान परिषद सदस्य चुने गए सिद्दीकी ने साल 2018 में बसपा छोड़ दी थी


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