*हजारों श्रमिकों के विरूद्ध बड़ा षड्यंत्र रचने की तैयारी में जुटा ग्रेसिम उद्योग।* - Aapki Awaaz

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*हजारों श्रमिकों के विरूद्ध बड़ा षड्यंत्र रचने की तैयारी में जुटा ग्रेसिम उद्योग।*

Vishnu sharma 
Place  - Ujjain - Nagda

*हजारों श्रमिकों के विरूद्ध बड़ा षड्यंत्र रचने की तैयारी में जुटा ग्रेसिम उद्योग।*


*आदित्य बिरला ग्रुप की इकाई ग्रेसिम इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा नागदा वासियों एवं उद्योग में कार्यरत श्रमिकों के सामने संकट।*


असंगठित मजदूर कांग्रेस के प्रदेश संयोजक अभिषेक चौरसिया ने ग्रेसिम उद्योग के चेयरमैन श्री कुमार मंगलम बिड़ला, राजश्री बिरला एवं बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को पत्र लिखकर मांग उठाई है कि ऐशिया की सबसे बड़ी स्टेपल फाइबर निर्माता कंपनी मेसर्स ग्रेसिम इंडस्ट्रीज लिमिटेड में कार्यरत 500 स्टाफ मेंबर्स, 1600 स्थायी श्रमिक और 3500 ठेका श्रमिकों का शोषण शुरू हो गया हैं । जहां झूठे आंकड़े प्रस्तुत करके एक तरफ रोजगार देने की बात कर प्लांट विस्तारीकरण की अनुमति प्राप्त करते हैं और दूसरी तरफ लोंगो को दिए हुए रोजगार को छीन रहे हैं । इस मामले में नागदा वासियों और मजदूरों के संबंध में बोर्ड विचार करें और मजदूरों के हित में निर्णय लेने का कार्य करें ।

 *वैश्विक महामारी कोरोना के नाम पर आर्थिक नुक़सान दिखा कर उद्योग प्रबंधन ने मजदूरों का शोषण शुरू कर दिया।*

 200 से 300 स्टाफ मेंबर्स को घर बिठा दिया हैं । अभी तक लगभग 50 वर्ष से कम उम्र के 15 से भी ज्यादा स्टाफ मेंबर्स को दबाव बनाकर जबरन इस्तीफा लेकर नौकरी से निकाल दिया गया है, यहीं नहीं उन्हें ग्रेच्युटी राशि भी पूरी नहीं देकर आधी दी गई हैं । मिली जानकारी के अनुसार 70 से 80 स्टाफ कर्मचारियों को निकालने की सूची तैयार की जा चुकी हैं। जिन्हें भी आगामी दिनों में निकालना लगभग तय हैं। एक तरफ 3500 ठेका श्रमिकों को बिना वेतन घर बिठाकर उनके हिस्से के समस्त कार्यों को स्टाफ मेंबर्स एवं स्थायी श्रमिकों से करवाया जा रहा है जैसे साफ़ सफ़ाई करवाना, सामान एक जगह से दूसरी जगह लेकर जाना, चाय लाना, नाली साफ करवाना, सामान उठवाना आदि कार्य भी करवाए जा रहे हैं ।

*2500 करोड़ का निवेश और दूसरी तरफ़ मज़दूरों को निकालना -*
 हाल ही में उद्योग को प्लांट विस्तारीकरण के लिए मिली पर्यावरणीय मंजूरी के बाद इस बात पर प्रश्न उठता हैं कि जहां उद्योग 2500 करोड़ रुपए का निवेश करने की तैयारी कर रहा है तो वर्तमान में कार्यरत श्रमिकों को बिना वेतन घर बिठाना, स्टाफ कर्मचारियों की छटनी शुरू करना और अब स्थायी श्रमिकों में भी सीआरएस (कंपल्सरी रिटायरमेंट सर्विस) के तहत बड़ी संख्या में 50 वर्ष से अधिक आयु के स्थायी श्रमिकों को निकालने की तैयारी भी शुरू हो चुकी हैं ।इस प्रकार के कृत्य करना कहीं न कहीं प्लांट विस्तारीकरण के नाम पर किए गए वादों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहे हैं ।

*500 करोड़ रुपए का दान देने वाली ओद्यौगिक इकाई की हालात इतनी गंभीर कैसे -*
 एक तरफ जहां उद्योग समूह द्वारा 500 करोड़ रुपए की राशि पीएम फंड में दान की गई और दूसरी तरफ पैसे नहीं होने का हवाला देकर पिछले 3 महीनों से हजारों ठेका श्रमिकों को घर बैठा कर उनके हिस्से के काम भी स्थायी एवं स्टाफ श्रमिकों से करवाए जा रहे हैं । अब नो वर्क नो पेमेंट के आधार पर सभी कर्मचारियों को उनकी हाज़िरी अनुसार ही सैलरी का भुगतान होगा । स्थायी श्रमिकों हेतु बनी पिता की जगह पुत्र को लगाने की पीएमआर योजना भी उद्योग प्रबंधन द्वारा बंद कर दी गई हैं । यह पूर्ण रूप मजदूरों का दमन करने वाली नीति हैं ।

*वर्ष 1954 से आज दिनांक तक कभी नहीं हुआ ग्रेसिम इंडस्ट्रीज लिमिटेड को घाटा -*

 उद्योग जब से प्रारंभ हुआ है यानी वर्ष 1954 से लेकर आज दिनांक तक कभी घाटे में नहीं गया हैं । बल्कि इनके मुनाफे से वडोदरा स्थित कॉरपोरेट रिज़र्व फंड भरा पड़ा हुआ हैं । पिछले 28 वर्षों में इनके द्वारा शेयर होल्डरों को बोनस तक नहीं दिया गया है जबकि टाटा, अंबानी आदि उद्योगों द्वारा उनके शेयर होल्डरों को भरपूर लाभ दिया गया है । ग्रेसिम उद्योग को प्रतिदिन 1 से 1.5 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ होता है । फिर भी आर्थिक नुक़सान दिखाकर सबको गुमराह करने का कार्य किया जा रहा हैं ।

*विस्तारीकरण में 6 हज़ार 746 लोगों को रोज़गार देने के वादे पर प्रश्नचिन्ह -*
 उद्योग के यूनिट सीनियर प्रेसिडेंट एवं हेड श्री के सुरेश के द्वारा भारत सरकार एवं मध्यप्रदेश शासन को प्रस्तुत किए गए आवेदन में प्रस्तुत आंकड़ों में बताया गया है कि विस्तारीकरण में 2 हज़ार 820 स्थायी श्रमिकों एवं 3 हज़ार 666 ठेका श्रमिकों को रोजगार दिया जाएगा । वहीं प्लांट के निर्माण कार्य के दौरान 110 स्थायी श्रमिक एवं अस्थाई श्रमिक के रूप में 150 लोगो को रोजगार दिया जाएगा । उद्योग 365 दिन रोज़गार देगा । प्लांट विस्तारीकरण अनुमति भी झूठे और फर्जी आंकड़े प्रस्तुत कर ले ली गई है । फिर ऐसी स्थिति में रोजगार सृजन का वादा एक हास्यास्पद प्रतीत होता है ।


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